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मुँह का कैंसर: इसके बारे में आपको क्या पता होना चाहिए

मुँह का कैंसर क्या होता है?

कैंसर कोशिकाओं की असामान्य और अत्यधिक वृद्धि के कारण बनने वाली अतिवृद्धि होती है। मुँह का कैंसर मुँह के किसी भी हिस्से, होंठों से लेकर आपके टॉन्सिल के पीछे और गले में हो सकता है। प्रभावित क्षेत्र होंठों से लेकर जीभ, मसूड़ों, कठोर और नरम तालु, गालों का अंदरूनी भाग, और मुँह का निचला हिस्सा तक हो सकते हैं।

 

डेटा के अनुसार भारत में रिपोर्ट किए गए सभी कैंसरों में से 30% मुँह के कैंसर हैं। यदि मुँह के कैंसर का शुरुआती चरण में ही पता चल जाता है तो जीवित रहने की दर अधिक होती है। 

 

मुँह के कैंसर का जोखिम किन व्यक्तियों में अधिक होता है?

 

मुँह के कैंसर के सभी मामलों में  4 में से 3 मामले पुरुषों, विशेषकर नियमित धूम्रपान करने वाले और शराब पीने वालों में देखे जाते हैं:

  • तंबाकू: धूम्रपान करने वाले व्यक्ति मुँह के कैंसर के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। तंबाकू में कई कैंसर-कारक रसायन उपस्थित होते हैं जो निरंतर कोशिकाओं के संपर्क में आने पर उनमें अनियमित वृद्धि का कारण बनते हैं।
  • शराब: धूम्रपान की तरह ही अत्यधिक शराब का सेवन भी एक कैंसर-कारक घटक होता है। एक अध्ययन के अनुसार प्रति सप्ताह 14+ शराब के ग्लास का सेवन आपकी कैंसर की संभावना काफ़ी बढ़ा देता है।
  • एसटीडी: यौन संक्रमण जैसे एचपीवी-16 वायरस के संपर्क में आने से भी आपके मुँह के कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है।

 

मुँह के कैंसर के चेतावनी लक्षणों को नज़रअंदाज़ ना करें, जिनमें आपके मुँह में लाल धब्बे जो बिना किसी स्पष्ट कारण के लगातार बने रहते हैं, शामिल हैं। लगभग 30% मामलों में ये धब्बे कैंसर में बदल सकते हैं।

 

मुँह के कैंसर का पता कैसे लगायें?

 

मुँह के अंदर लगातार दर्द के साथ घाव या गांठ जो सही नहीं हो रही हो, मुँह के कैंसर का चेतावनी संकेत हो सकता है। अतः इस स्थिति में:

  • नियमित रूप से अपने दंतचिकित्सक द्वारा मुँह के कैंसर की जांच कराएं 
  • साल में कम से कम दो बार वार्षिक मौखिक स्वच्छता जाँच कैम्प में भाग लें 
  • अपना आहार और जीवनशैली की आदतें बदलकर मुँह की स्वच्छता बनाए रखें

 

This blog is a Hindi version of an English-written Blog - Oral Cancer: What You Need to Know

Medanta Medical Team
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