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भारत में मानसून में बीमारियाँ: इनके बारे में आपको क्या जानकारी होनी चाहिए।

भारत में मानसून हर वर्ष औसतन जुलाई से सितंबर के बीच आता है। यह मौसम गर्मी से राहत देता है और ताजगी भरता है, लेकिन मानसून की शुरुआत अपने साथ ढेर सारी बीमारियाँ और तरह-तरह के संक्रमण लेकर आती है जो आपके और आपके परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे पैदा कर सकते हैं।

 

पर अच्छी खबर ये है कि मानसून में कुछ बुनियादी सावधानियों का पालन करने पर स्वस्थ रहना काफी सरल हो सकता है। आइये इस ब्लॉग में जानें कि आप इस मानसून में सुरक्षित और स्वस्थ कैसे रह सकते हैं।

 

मानसून में रोग तेज़ी से क्यों फैलते हैं?

 

मानसून के दौरान आपका कई वायरस, बैक्टीरिया और अन्य संक्रमण के संपर्क में आने का खतरा दूसरे मौसम से दोगुना हो जाता है। हवा में नमी के उच्च स्तर के कारण हानिकारक सूक्ष्मजीवों की संख्या में वृद्धि होती है, जिससे कई बीमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है।

 

इन मानसूनी बीमारियों में से कई बीमारियों की पहचान तब तक नहीं हो पाती है जब तक वे कोई बड़ी स्वास्थ्य समस्या पैदा कर दें। इस मौसम के दौरान कुछ बुनियादी रोकथाम और स्वच्छता उपायों के साथ नियमित जांच से आप सुरक्षित और स्वस्थ रह सकते हैं

 

भारत में सबसे आम मानसून-संबंधी बीमारियाँ कौन सी हैं?

 

मानसून के दौरान बीमारियाँ मुख्यतः 4 प्रमुख माध्यमों से फैलती हैं: मच्छर, पानी, हवा और दूषित भोजन। आइए इनके बारे में ओर जानकारी प्राप्त करते हैं:

 

A. मच्छर जनित बीमारियाँ

 

मानसून मच्छरों और मच्छरों से होने वाली बीमारियों के लिए एक उपयुक्त समय होता है। भारत में मच्छरों से होने वाली बीमारी एक बड़ी समस्या होती है। संपूर्ण विश्व की तुलना में भारतवर्ष में डेंगू के 34% और मलेरिया के 11% मामले दिखाई देते हैं।

  • मलेरिया: मलेरिया जिसका कारण प्लाज्मोडियम परजीवी होता है, जो भारत में मानसून के दौरान एक मुख्य स्वास्थ्य चिंता बन चुकी है। मानसून मच्छरों (मुख्यतः एनोफिलीस मिनिमस) के प्रजनन का समय होता है मलेरिया जो इस फैलाने वाले परजीवी का मेजबान होते है। यह मच्छर पानी की धाराओं और नालों में प्रजनन करता है और इसके काटने से परजीवी हमारे शरीर में आता है और उच्च बुखार (105 डिग्री सेल्सियस तक) का कारण बन जाता है।
  • डेंगू: डेंगू कारक एडीस एजिप्टी मच्छर मुख्यतः जमा पानी वाले क्षेत्र (जैसे बाल्टी, ड्रम, फूलदान, कुआं और पेड़ के छेद) में प्रजनन करते हैं। परिवर्तनशील और शहरीकरण के साथ, ये जीवजंतु अपने आप को अनुकूलित कर चुके हैं और ये अब शहरी घरों में भी होने लग गए हैं। डेंगू बुखार संक्रमित होने के छह से सात दिन बाद शुरू होता है, और इसके शुरुआती लक्षण बुखार और थकान होते हैं।
  • चिकनगुनिया: चिकनगुनिया का कारण एडीस एल्बोपिक्टस मच्छर होता है, एक गैर-घातक वायरल बीमारी होती है। ये मच्छर रुके हुए पानी में प्रजनन करते हैं और यह आपको रात में ही नहीं बल्कि दिन में भी काट सकते हैं। 'चिकनगुनिया' का मतलब है जो झुक जाता है और इसलिए इसको इसके गठिया के विशिष्ट लक्षण (जोड़ों और हड्डियों में दर्द, अकड़न) के कारण चिकनगुनिया बुलाया जाता है

 

मानसून में मच्छरों से होने वाली बीमारियों से सुरक्षित रहने के लिए यह उपाय:

मलेरिया, डेंगू, और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों में व्यक्ति को तेज बुखार, ठंड, शरीर में दर्द और थकान जैसे लक्षण महसूस होते हैं। अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई देते हैं, तो अपने डॉक्टर से तुरंत परामर्श करें। मानसून की शुरुआत से ही इन बीमारियों से बचने के लिए आप निम्नलिखित सावधानियों का पालन कर सकते हैं:

  • अपने घर में मच्छर से बचने के लिए मच्छरदानी का उपयोग करें
  • अपने घर और उसके आसपास पानी इकट्ठा होने दें
  • अपनी स्वच्छता बनाए रखें और अपने बाथरूम को नियमित रूप से साफ करें
  • घर से बाहर निकलने से पहले मच्छर भगाने वाली क्रीम या लोशन का उपयोग करें

 

B. पानी से संचारित होने वाली बीमारियाँ

 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार, भारत में पानी से संचारित बीमारियों से 3.4 मिलियन से अधिक लोग प्रभावित होते हैं। बच्चे विकासशील प्रतिरक्षा प्रणाली (डेवलपिंग इम्युनिटी) के कारण सबसे आसान शिकार होते हैं, सबसे आम पानी से संचारित बीमारियाँ निम्नलिखित हैं:

  • टाइफाइड, एस टायफी बैक्टीरिया के कारण होता है, जो साफ़ सफाई की कमी के कारण फैलता है। बिना ढके हुए या ख़राब खाना और प्रदूषित पानी पीना टाइफाइड संक्रमण के दो मुख्य कारण होते हैं। इसके लक्षण में बुखार, सिरदर्द, जोड़ों में दर्द, और गले में खराश शामिल हैं।
  • कोलेरा, आस-पास की गंदगी और प्रदूषित भोजन के कारण फैलता है, जिसके लक्षणों में दस्त शामिल होते हैं।
  • लेप्टोस्पिरोसिस, जिसे वैल' डिजीज भी कहा जाता है, मानसून के दौरान गंदे पानी या कीचड़/मिट्टी से संपर्क में आने के कारण होता है। इसके लक्षणों में कंपकपी, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, और बुखार शामिल होते हैं। यदि आपको चोट या नील पड़े है, तो सुनिश्चित करें कि आप घर से बाहर निकलने से पहले इसे पूरी तरह से ढकें।
  • जॉण्डिस या पीलिया, प्रदूषित भोजन और पानी के माध्यम से होता है, और खराब सफाई के कारण होता है। यह लिवर में विकार का कारण बनता है, इसके साथ, इसके लक्षण में कमजोरी और थकान, पीला पेशाब, आंखों का पीला होना, और उल्टी शामिल हैं। 2019 में जून महीने में कटक, उड़ीसा में 38 जॉण्डिस के मामले देखे गए थे, और इसका कारण राज्य में ख़राब सफाई व्यवस्था माना गया है।
  • गैस्ट्रों-इंटेस्टाइनल संक्रमण, जैसे कि उलटी, दस्त मुख्यतः बासी ख़राब खाने या प्रदूषित खाने और पानी के सेवन के कारण होते हैं। पेट के संक्रमण से बचने के लिए पानी को उबालकर कर पीने और सिर्फ ढके हुए खाद्य पदार्थ को खाने की सलाह दी जाती है
  • हेपेटाइटिस , यह एक वायरल संक्रमण होता है जो प्रदूषित भोजन और पानी से फैलता है। यह आपके लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है और थकान, बुखार, संतुलन में कमी, पीली आंखें, गहरे रंग का पेशाब, और भूख में अचानक कमी के लक्षण दिखा सकता है।

 

पानी से संचारित बीमारियों से सुरक्षित रहने के लिए नीचे कुछ बचाव और सावधानियां बताई गई हैं जिन्हें आप अपना सकते हैं:

  • इस मौसम में हमेशा पानी उबाल कर पिए और फल और सब्जियों को खाने से पहले अच्छे से धो लें 
  • हमेशा खाने को ढक कर रखें और बाहरी भोजन का सेवन करें
  • हर समय अपनी पर्यावरण की स्वच्छता का ध्यान रखें (हाथों को सैनिटाइज़र से साफ़ करते रहें या अक्सर हाथ धोते रहें)
  • यह सुनिश्चित करें कि आपके क्षेत्र में खुले नाले और खड्डे ढके गए हैं
  • अगर आपके बच्चे को टीकाकरण नहीं हुआ है तो उनका टीकाकरण अवश्य करवाएं

 

C. हवा से संचारित होने वाली बीमारियाँ

 

मानसून हवा से फैलने वाले कई संक्रमण साथ लाता है, जो वायु के माध्यम से छोटे विषाणु (बीमारी प्रकट करने वाले वायरस) द्वारा फैलते हैं, जिसके परिणामस्वरूप सामान्य फ्लू, वायरल बुखार, सर्दी, खांसी और गले में खराश जैसे लक्षण दिखाई देते हैं ये अधिकांशतः हल्की बीमारियाँ होती हैं और वयस्कों में मामूली संक्रमण का कारण बन सकती हैं। हालांकि, कमजोर या विकसित हो रहे इम्यून सिस्टम के कारण इस मौसम के दौरान ज्यादातर बूढ़े और बच्चे इस संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। हवा से फैलने वाली सामान्य बीमारियों में शामिल हैं:

  • सर्दी और फ्लू: यह सबसे सामान्य वायरल संक्रमण होता हैं, जो मानसून के दौरान तापमान में अचानक परिवर्तन के कारण होते हैं एक कमजोर इम्यून सिस्टम हमें इन मामूली संक्रमणों के बीमार होने के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है। सर्दी और फ्लू में नाक बहना, गले में खराश, आंखों में पानी, बुखार और ठंड जैसे लक्षण महसूस होते हैं।
  • इन्फ्लुएंजा, सामान्यतः मौसमी "फ्लू" के रूप में जानी जाने वाली यह सीज़नल बीमारी, आसानी से व्यक्ति से व्यक्ति तक फैलती है और मुख्य रूप से वायु के माध्यम से संचारित होती है।

 

इस मौसम में वायु से संचारित बीमारियों से सुरक्षित रहने के लिए कुछ बचाव और सावधानियां हैं:

  • खाँसते या छींकते समय मुँह और नाक को रूमाल या कोहनी से ढक लें
  • बार बार गर्म पानी पिएँ और बाहर जाते समय अपना उबला हुआ पानी साथ ले कर जाएं
  • अपने बच्चों को पहले से प्रभावित लोगों से दूर रखें और सुनिश्चित करें कि वे बाहर से घर आने पर अपने हाथ और पैरों को धोएँ
  • सुनिश्चित करें कि आपके घर का वातावरण हर समय अच्छी तरह हवादार हों

 

मानसून का आनंद लेने के लिए कुछ आसानी से पालन करने योग्य सुझाव

भारतीय मानसून में वातावरण में अधिक नमी के कारण कई त्वचा और बालों से संबंधित समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। मुहाँसे, खुजली, एलर्जी, बालों का झड़ना और रूसी इस मौसम में ये सामान्य समस्याएँ आपको हो सकती हैं।

 

मॉनसून में सुरक्षित रहने के लिए कुछ सामान्य तरीके निम्नलिखित हैं:

  • हमेशा अपने आप को हाइड्रेटेड रखें - सुनिश्चित करें कि आप केवल उबला हुआ पानी पीएं, और बाहर से कुछ भी नहीं पिएँ।
  • व्यक्तिगत स्वच्छता का पालन करें ताकि फंगल और अन्य संक्रमण से बचा जा सके।
  • अपनी त्वचा को सुरक्षित रखने के लिए पूरी आस्तीन वाले हल्के कपड़े पहनें।
  • संतुलित आहार लें और अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत रखें।
  • ताज़ी अच्छी तरह से धुली हुई, उबली हुई सब्जियों का ही सेवन करें। चिकनाई, तेल और सोडियम की खपत को कम करें, और डेयरी उत्पादों से बचें क्योंकि इनमें आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माइक्रोऑर्गेनिज़म हो सकते हैं।

 

बोनस सुझाव: हल्का भोजन खाएं, और अपने सब्जियों और फलों को सिरके से धोएँ क्योंकि अम्ल आपके आहार में मौजूद किसी भी हानिकारक बैक्टीरिया को समाप्त करने में मदद कर सकता है।

 

जैसे हम सभी मानसून और उससे मिलने वाली राहत से प्यार करते हैं, वैसे ही हमें मानसून से होने वाली बीमारियों और उनसे बचाव के बारे में हमेशा सूचित और सचेत रहना चाहिए। ऊपर लिखे हुए लक्षणों को ध्यान में में रखें। सेल्फडायग्नोसिस और ओटीसी दवाओं से बचें, और यदि आपको इन बीमारियों में से किसी के भी लक्षण नज़र आते हैं तो तुरंत अपने चिकित्सक से परामर्श करें।

 

This blog is a Hindi version of an English-written Blog - Monsoon Illnesses in India – All You Need To Know

Medanta Medical Team
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