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खेल के चोट (Sports Injuries)- कारण, प्रकार, और उपचार

खेल की चोटें आमतौर पर व्यायाम करते समय या कोई खेल खेलते समय होती हैं। यदि आप एक खिलाड़ी हैं, तो आपको कभी कभी किसी चोट का सामना करना पड़ा होगा।

आप खेल-संबंधी चोटों के खतरे में तब होते हैं अगर आप:

  • नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि नहीं करते हो 
  • व्यायाम से पहले सही वार्मअप नहीं करते हो 
  • संपर्क खेल (contact sports) खेलते हो 

 

खेल-संबंधी चोटें युवा वयस्क और बच्चों में अधिक देखी जाती हैं। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार, हर साल लगभग 3.5 मिलियन बच्चे और किशोर संपर्क खेलों के दौरान खेल-संबंधी चोटों का सामना करते हैं। मोच और मसल खिंचाव खिलाड़ियों में सबसे आम खेल-संबंधी चोट होती हैं। फुटबॉल और बास्केटबॉल जैसे संपर्क खेल में गैर-संपर्क खेलों जैसे तैराकी और दौड़ की तुलना में अधिक खेल-संबंधी चोटों का जोखिम होता है।

 

खेल-संबंधी चोटों के प्रकार

 

विभिन्न खेल-संबंधी चोटें अलग-अलग प्रकार के लक्षण और जटिलताएँ पैदा करती हैं। स्पोर्ट इंजरी के सामान्य प्रकार निम्नलिखित हैं:

  • मोच: जब लिगामेंट आवश्यकता से अधिक खिंच जाती हैं या फट जाती हैं, तो इससे मोच जाती है।
  • स्ट्रेन: टेंडन या मांसपेशियों को अतिरिक्त खिंचाव या फट जाना मांसपेशियों में स्ट्रेन का कारण बनता है।
  • फ्रैक्चर: चोट लगने या अधिक दबाव के कारण हड्डियों के टूट जाने को फ्रैक्चर कहते हैं।
  • डिस्लोकेशन्स (Dislocations): यह तब होता है जब कोई हड्डी अपने सॉकेट से बाहर निकल जाती है और इसके परिणामस्वरूप दर्द, सूजन और कमजोरी जाती है।
  • रोटेटर कफ में चोट: रोटेटर कफ हमारी कंधे के मांसपेशियों की गतिशीलता में अहम भूमिका निभाता है। इन मांसपेशियों में किसी भी प्रकार की टूट-फूट रोटेटर कफ की कमजोरी का कारण बन सकता है।
  • सुन्नता या झनझनाहट: सुन्नता या झुनझुनाहट के लक्षण का कारण नर्व में दबाव हो सकता है। यह चोट गंभीर हो सकती है, और आपको तुरंत एक चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
  • जोड़ों में दर्द: जोड़ों में दर्द और असहजता जोड़ों के भीतर संरचनात्मक क्षति या चोट का लक्षण हो सकता है। जोड़ों  का दर्द छह हफ्ते के भीतर ठीक हो जाना चाहिए। यदि आपका दर्द इतने समय के बाद भी बना रहता है, तो आपको अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
  • सूजन: यह इंफ्लेमेशन का संकेत होता है। यह किसी चोट के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया होती है, और आपकी इम्युनिटी की उपचारात्मक प्रतिक्रिया की शुरुआत का भी संकेत देता है। अक्सर सूजन तब होती है जब चोट के बाद क्षतिग्रस्त ऊतक या हड्डी को बचाने और ठीक करने के लिए रक्त और तरल पदार्थ एकत्रित हो जाते हैं। 
  • छूने पर संवेदना या दर्द: यदि आप उंगली से दबाने पर किसी विशेष बिंदु पर दर्द महसूस करते हैं, तो यह किसी बड़ी चोट का संकेत हो सकती है, खासकर यदि यह संवेदना किसी हड्डी, मांसपेशी या जोड़ के क्षेत्र में महसूस होती है।
  • अस्थिरता: यदि आपको लगता है कि आपके जोड़, जैसे कि घुटने, कुछ गतिविधियों जैसे दौड़ने या सीढ़ियों पर चढ़ने के दौरान स्थिर महसूस नहीं हो रहे हैं, तो एक फटी हुई लिगामेंट की संभावना को दूर करने के लिए पेशेवर डॉक्टर से परामर्श करने के लिए तुरंत संपर्क करें।
  • अकड़न: अकड़न या सीमित गतिविधि खेल-संबंधी चोट की गंभीरता का एक स्पष्ट संकेत हो सकती है।
  • कमजोरी: खेल के दौरान चोट लगने के बाद, यदि आपको चोटी लगने वाले स्थान पर ताकत में कमी महसूस होती है, तो यह मांसपेशी या टेंडन में संरचनात्मक क्षति को इंगित करती है। अगर इस कमजोरी के कारण आप अपने हाथ को पूरा उठा नहीं पा रहे हैं या सही से चल नहीं पा रहे हैं, तो संभावित चोटों के खतरे से बचने के लिए अपने डॉक्टर से जल्द से जल्द संपर्क करें।
  • लालिमा: घर्षण, एलर्जी या संक्रमण के बाद चोट के स्थान पर आई सूजन के कारण लालिमा (redness) हो सकती है। यदि आपके चोट के स्थान पर त्वचा पर अस्पष्ट लालिमा के साथ उस क्षेत्र का तापमान बढ़ा हुआ हो, तो अपने डॉक्टर से इन लक्षणों के बारे में बात करें।
  • भ्रम या सिरदर्द: सिर के लिए हल्की चोट के फलस्वरूप मस्तिष्काघात (concussion)हो सकता है। इसके कारण संज्ञानात्मक लक्षण, जैसे कि भ्रम, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, स्मृति-संबंधी समस्याएँ, सिरदर्द, चक्कर आना, मतली और चिढ़चिढ़ापन अनुभव हो सकते हैं। सिर में चोट लगने से जीवन-घातक परिणाम हो सकते हैं, अतः इसे नज़रअंदाज़ करें।

 

खेल-संबंधी चोट से सबसे ज़्यादा प्रभावित होने वाले अंग कौनसे हैं?

 

हालाँकि, कोई भी खेल खेलते समय सबसे आमतौर पर व्यक्ति के जोड़ स्पोर्ट इंजरी के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, परंतु खेल के दौरान शरीर के किसी भी अंग को चोट लग सकती है। खेल के दौरान लगने वाली चोट से  निम्नलिखित शरीर के अंग प्रभावित हो सकते हैं:

  • सिर: एथलेटिक सिर की चोट में सबसे आम चोट कन्कशन होती है, जो कि एक तेज धक्के, टक्कर या हिंसक तरीक़े से सिर को हिलाने से मस्तिष्क पर लगने वाली चोट होती है। कन्कशन मस्तिष्क की एक दर्दनाक चोट होती है जो मस्तिष्क की संज्ञानात्मक कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती है।
  • कंधे: कंधे की सबसे आम समस्या में रोटेटर कफ की सूजन या फटना, लैब्राल चोट जैसे बैंकार्ट चोट, हैगल घाव, एलप्सा घाव शामिल हैं।
  • कोहनी: कोहनी के जोड़ों की खेल-संबंधी टेंडन समस्याओं में सबसे आम टेनिस एल्बो (लैटरल एपिकॉन्डायटिस) और गोल्फर्स एल्बो (मीडियल एपिकॉन्डायटिस) हैं।
  • कलाई: खिलाड़ियों में कलाई की हड्डी का फ्रैक्चर एक आम समस्या है। खेलते समय फैली हुई भुजा पर गिरने से कलाई में फ्रैक्चर हो सकता है।
  • उंगली: जोड़ों के बाहर विस्थापन (Dislocation), उंगली की सूजन, और उंगलियों का अटकना जैसे आम खेल-संबंधी चोट हो सकते हैं।
  • रीढ़: खिलाड़ियों में सबसे आम रीढ़ की हड्डी की चोट पीठ की निचली मांसपेशियों में गंभीर खिंचाव हैं।
  • जांघ: हैमस्ट्रिंग, क्वाड्रिसेप्स और एडक्टर मांसपेशियों में स्ट्रेन, खिंचाव, या फटना आम खेल-संबंधी जांघ की चोटें होती हैं। ये चोट तब होती है जब जांघ की मांसपेशी इसकी सीमा से अतिरिक्त खींच जाती है, जिससे मांसपेशियों के फ़ाइबर फट जाते हैं।
  • घुटना: घुटने की सबसे आम खेल-संबंधी चोट में घुटने के आगे के हिस्से का दर्द (पटेलोफेमोरल पेन सिंड्रोम), कोंड्रोमलेसिया पटेला, जो घुटने के नीचे की तरफ पटेला की कार्टिलेज के सॉफ्ट होने के कारण होता है, शामिल हैं।
  • टखना: टखने की सबसे आम खेल-संबंधी चोट में टखने की मोच होती है।
  • पैर: प्लांटर फैसीआइटिस एक खिलाड़ियों के लिए सामान्य पैर की खेल-संबंधी चोट होती है, जो पैर के आर्च को बनाने वाले मोटे, सख्त ऊतक में इर्रिटेशन के कारण होती है। खेल के दौरान चोट के कारण यह पैर के तल का फ़ैशिया सिकुड़ सकता है और जिससे तेज़ दर्द हो सकता है।

 

खेल-संबंधी चोट के कारण

 

एक खेल के दौरान लगने वाली चोट कई कारणों से हो सकती है, जिसमें दुर्घटनाओं, खराब प्रशिक्षण तकनीक, अनुचित उपकरण, कंडीशनिंग की कमी, या अपर्याप्त वार्म-अप और स्ट्रेचिंग शामिल हो सकती हैं।

 

स्पोर्ट इंजरी दो प्रकार की श्रेणियों में आती हैं:

  • एक्यूट चोट: यह अचानक हुई एक दुर्घटना के कारण होती है, और इसमें तुरंत लक्षण उत्पन्न होते हैं। उदाहरण के लिए, एक फिसलने, गिरने, टैकल करने, या टक्कर लगने से एक्यूट चोट लग सकती है।
  • क्रॉनिक चोट: यह दीर्घकालिक चोट होती है। यह एक एक्यूट चोट के रूप में शुरू हो सकती है जो सही नहीं होती है, या जोड़ के का अत्यधिक उपयोग या अनुचित प्रयोग से उत्पन्न हो सकती है। कई खिलाड़ी दर्द के साथ भी खेलते रहते हैं, जिससे कारण क्रॉनिक चोट हो सकती है।

 

कौन कौन से लोग जोखिम में होते हैं?

  • छोटे बच्चे जिनमें गिरने की प्रवृत्ति होती है, जिससे चोट लग सकती है।
  • बढ़ती उम्र
  • चोट को गंभीरता से लेना
  • अधिक वजन होना

 

खेल-संबंधी चोटों का निदान

अधिकांश लोग रूटीन शारीरिक परीक्षण या चेकअप के दौरान खेल-संबंधी चोटों से परिचित होते हैं। निम्नलिखित कुछ नैदानिक उपाय हैं जो खेल की चोट को पहचानने में मदद कर सकते हैं:

  • शारीरिक परीक्षण: आपके डॉक्टर या चिकित्सक आपके जख्मी हुए जोड़ या शरीर के भाग को हिलाने का प्रयास कर सकते हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितनी मोबिलिटी है और कितनी क्षति हुई है।
  • चिकित्सा इतिहास: डॉक्टर चोट और आपकी पिछली चिकित्सा समस्याओं के बारे में विभिन्न प्रश्न पूछेंगे ताकि स्थिति का विश्लेषण किया जा सके।
  • इमेजिंग टेस्ट: एक्स-रे, एमआरआई, सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड जैसे इमेजिंग परीक्षण आपके डॉक्टर को खेल की चोट का कारण निर्धारित करने में मदद कर सकते हैं।

 

खेल-संबंधी चोटों का उपचार

खेल-संबंधी चोटों का उपचार चोट के स्थान और गंभीरता पर निर्भर करता है। अधिकांश चोटों के लिए प्रारंभिक उपचार में सूजन को नियंत्रण में रखना और उपचार प्रतिक्रिया को बढ़ावा देना शामिल होता है।

अधिकांश एक्यूट चोटों का प्रारंभिक उपचार में RICE उपाय शामिल होता है, जिसमें शामिल हैं:

R- रेस्ट या आराम: खेल के दौरान लगी चोट को ठीक होने के लिए एक आराम अवधि की आवश्यकता होती है। इस दौरान दर्द, सूजन या तकलीफ का कारण बनने वाली शारीरिक गतिविधियों से बचें।

I- आइस: जख्मी हुए क्षेत्र पर रोजाना कम से कम 15-20 मिनट के लिए 4-8 बार आइस पैक रखें। आप ठंडे सेक के लिए एक बर्फ की थैली या तौलिये में लपेटी हुई बर्फ का भी उपयोग कर सकते हैं।

C-कम्प्रेशन: एलास्टिक बैंडेज़ द्वारा जख्मी हुए क्षेत्र पर कम्प्रेशन या नियमित दबाव बनाए रखने से सूजन में कमी आती है। चोटिल क्षेत्र को अधिक से अधिक कसकर बांधने से बचें, क्योंकि इससे रक्त संचार रुक सकता है।

E- उच्चीकरण (Elevation): चोटिल क्षेत्र को आपके हृदय स्तर से ऊपर उठा कर रखे रहने से सूजन को कम करने में मदद मिलती है।

डॉक्टर खेल-संबंधी चोटों के उपचार के लिए एक अन्य तकनीक की भी सिफारिश करते हैं, जिसे POLICE (संरक्षण, प्रभावशाली भार (ऑप्टीमल लोडिंग), आइस, कम्प्रेशन और उच्चीकरण) कहा जाता है। कुछ प्रभावित नुस्ख़े जैसे चोट लगने वाले जोड़ को क्रचेज़ या एक स्लिंग जैसे सहायक उपकरण से संरक्षित करना, जोड़ को धीरे-धीरे हिलाना, और धीरे-धीरे वजन डालना, आम तौर पर हीलिंग को तेज़ करने में मदद करते हैं।

प्रारंभिक हीलिंग अवधि के बाद, डॉक्टर निर्धारित करेगा कि क्या आपको अतिरिक्त उपचार आवश्यकता है या आपके विशिष्ट चोट के उपचार के लिए एक विशेषज्ञ के पास रेफेर किया जाना चाहिए।

खेल-संबंधी चोटों के उपचार में शामिल तकनीकें निम्नलिखित हैं:

  • एक स्प्लिंट, प्लास्टर या ब्रेस द्वारा अस्थिरीकरण (Immobilization)
  • दर्द के लिए दवा
  • दर्द को कम करने वाले इंजेक्शन
  • फ़िज़ियोथेरेपी 
  • शल्य चिकित्सा

 

खेल-संबंधी चोट की रोकथाम के उपाय 

खेल के दौरान चोट लगने से बचने का सबसे अच्छा तरीका खेल के प्रारंभ से पहले सही तरीके से वार्म-अप करना और स्ट्रेचिंग करना है। ठंडे मांसपेशियों में अधिक स्ट्रेच होने और फटने की संभावना ज़्यादा होती है, जबकि गरम मांसपेशियां अधिक लचीली होती हैं। इसलिए, किसी भी खेल या तेज़ गतिविधियों से पहले कम से कम 10-15 मिनट तक वार्म-अप करें।

इसके अलावा, खेल के दौरान चोट लगने से बचने के लिए निम्नलिखित कदम उठाएं:

  • सही तकनीक का प्रयोग करें
  • सही उपकरणों का प्रयोग करें
  • अधिक खेले या व्यायाम करें
  • खेलने के बाद कुछ समय शांत होने में व्यतीत करें
  • धीरे-धीरे गतिविधि को फिर से शुरू करें

 

चिकित्सक से कब परामर्श करें?

 

खेल के के दौरान चोट लगना एक आम स्थिति होती है। यदि आपको कोई ऐसी चोट लगी है जो साधारण उपचार से ठीक नहीं हो रही है और समय के साथ बिगड़ रही है, तो किसी चिकित्सक से परामर्श करें।

 

यदि आपको निम्नलिखित लक्षण महसूस हो रहें हो तो आपको चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए:

  • चोटिल क्षेत्र का उपयोग करने में कठिनाई होना 
  • जोड़ों को हिलाने में परेशानी महसूस होना 
  • चोटिल क्षेत्र की विकृति
  • रक्तस्राव या त्वचा पर जख्म
  • संक्रमण के संकेत, जैसे ज्वर, ठंड लगना, और पसीना आना 
  • सिरदर्द, चक्कर, भ्रम, या कन्कशन

 

निष्कर्ष:

खिलाड़ियों के लिए खेल से ब्रेक लेना कभी भी आसान नहीं होता है। खेल-संबंधी चोट को नज़रअंदाज़ करने से आपको बहुत अधिक समय तक खेल से बाहर रहना पड़ सकता है या फिर आपको खेलने से रोक सकता है। अतः इस दौरान अपने शरीर की सुनें और यदि आवश्यक हो तो चिकित्सक की सलाह लें।

Medanta Medical Team
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