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ब्लड कैंसर: भारत में बढ़ता एक रोग

भारत, एक तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है जो जनसंख्या के मामले में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है। हालाँकि, पिछले दशक में भारत में कैंसर के मामलों की बढ़ती वृद्धि एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता का विषय बन गई है| हर साल लगभग 1.5 मिलियन मामले दर्ज होने के साथ, कैंसर जैसी बीमारियों का बोझ व्यक्तियों में शारीरिक दुष्परिणामों के साथ-साथ देश के सामाजिक स्तर पर भी बड़ा प्रभाव डालता है। 

 

ब्लड कैंसर क्या है और इसके मुख्य प्रकार क्या हैं? 

 

ब्लड कैंसर रक्त बनाने वाले ऊतकों में शुरू होता है, और आपके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करता है। रक्त कैंसर मुख्यतः तीन प्रकार का होता है: लिम्फोमा (ब्लड कैंसर के 64% मामले), ल्यूकेमिया (25%) और मल्टीपल मायलोमा (11%)  

 

ब्लड कैंसर का क्या कारण है?

 

हालाँकि ऐसा कोई निर्णायक डेटा उपलब्ध नहीं है जो भारत में रक्त कैंसर की बढ़ोतरी को सिद्ध कर सके, लेकिन अस्पतालों में किए जा रहे अस्थि मज्जा प्रत्यारोपणों की संख्या में हर साल बढ़ोतरी हो रही है।

रक्त कैंसर के मुख्य कारण अभी तक ज्ञात नहीं हुए हैं। हालांकि, कुछ कारक जो रक्त कैंसर के ख़तरे को बढ़ाते हैं वो निम्नलिखित हैं:

  • उम्र: विभिन्न प्रकार के ब्लड कैंसर विभिन्न आयु समूह के व्यक्तियों को प्रभावित करते हैं, जैसे कि ल्यूकेमिया सबसे अधिक 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में या 40 साल से अधिक उम्र के लोगों में होता है।
  • तंबाकू: किसी भी रूप में तंबाकू का सेवन कैंसर के ख़तरे को बढ़ा सकता है। यह व्यक्ति के प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करता है और व्यक्ति के डीएनए को परिवर्तित या नुकसान पहुँचा सकता है, जिससे व्यक्ति कैंसर विकसित करने के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है, जिसे नियंत्रित करना कठिन हो जाता है।
  • शराब: अत्यधिक शराब का सेवन आपकी अस्थि मज्जा में नई कोशिकाओं के उत्पादन में रुकावट उत्पन्न कर सकता है।
  • रेडिएशन और हानिकारक रासायनिक पदार्थों के संपर्क में आना: भारत जैसे एक प्रगर्तिशील देश में बढ़ते शहरीकरण और व्यावसायिक परिवर्तन के साथ, हानिकारक विकिरण और रासायनिक पदार्थों के संपर्क से डीएनए में परिवर्तन हो सकता है, जिससे आपमें ब्लड कैंसर के विकास का जोखिम बढ़ जाता है।
  • पारिवारिक इतिहास: यदि आपके परिवार में रक्त-संबंधी बीमारियों का इतिहास है, तो संभावित है कि आपको रक्त कैंसर के लक्षणों का सामना करना पड़ सकता है।

 

भारत में रक्त कैंसर के आँकड़े

 

विभिन्न अध्ययनों के अनुसार, भारत ब्लड कैंसर के दर्ज किए गए मामलों में संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बाद तीसरे स्थान पर है और यह कैंसर देश में 70,000 से अधिक पुरुषों और महिलाओं को प्रभावित करता है। यह बढ़ता हुआ आँकड़ा भारत में स्वास्थ्य प्रशासकों के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन चुका है।

 

हालांकि, हमने ब्लड कैंसर को समझने और इसके उपचार के क्षेत्र में अधिक ज्ञान और कौशल प्राप्त किया है, लेकिन अब भी हमारे पास एक विकासशील देश के रूप में इस समस्या के लिए विशेष चुनौतियां मौजूद हैं। उच्च आबादी होने के कारण, पश्चिमी देशों की तुलना में दर्ज किए गए मामलों की संख्या कम है, लेकिन मृत्यु दर अधिक है।

 

इसके पीछे कई कारक हैं, जिसमें अच्छे स्वास्थ्य प्रणाली की कमी, ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ते स्वास्थ्य देखभाल की कम पहुंच, और ब्लड कैंसर पर जागरूकता और शिक्षा की कमी शामिल हैं।

 

ब्लड कैंसर के उपचार और रोकथाम

 

अधिकांश ब्लड कैंसर के मामलों में मरीज़ को अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है ताकि वे जीवित रह सकें और लंबा जीवन जीने में सक्षम हो सकें। ब्लड कैंसर के उपचार का मुख्य उद्देश्य स्थिति का इलाज करना और प्रभावित लोगों के जीवन को बढ़ाना होता है। जागरूकता की कमी, जीन पूल में विविधता और अस्थि मज्जा दान के संबंध में सामान्य भ्रम के कारण, भारत को मांग और आपूर्ति में एक बड़े गैप का सामना करना पड़ता है।

 

यदि हम शुरुआती स्टेज में कैंसर उपचार में आवश्यक उपचार करें, तो भविष्य में होने वाले कैंसर के ख़तरे को कम से कम 30% कम किया जा सकता है। तंबाकू बिक्री और इसके सेवन के नियंत्रण से लेकर आहार में परिवर्तन, चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार और इसके, जोखिमों, रोकथाम और अस्थि मज्जा दान के बारे में जागरूकता और शिक्षा कार्यक्रम, जैसे कई कार्य भारत में ब्लड कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए किए जा सकते हैं।

Medanta Medical Team
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