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पुरुष में यूरोलॉजी समस्याएँ और स्थितियाँ

पुरुष में यूरोलॉजी समस्याएँ और स्थितियाँ

यूरोलॉजी वह चिकित्सा शाखा है जो जनन-मूत्र प्रणाली को प्रभावित करने वाली बीमारियों और विकारों का निदान और उपचार करती है, और इस क्षेत्र में प्रशिक्षित डॉक्टर को यूरोलॉजिस्ट कहा जाता है। यूरोलॉजिस्ट पुरुषों और महिलाओं में मूत्र प्रणाली की समस्याओं को संबोधित करते हैं, और पुरुष जनन अंगों जैसे कि लिंग, प्रोस्टेट, एपिडीडिमिस, वीर्य पुटिका और वृषण में समस्याओं का समाधान करते हैं। जैसे-जैसे पुरुषों की उम्र बढ़ने लगती हैं, तो उन्हें जननांग प्रणाली से संबंधित कुछ लक्षणों का अनुभव होना स्वाभाविक होता है। आयु के अलावा, आनुवंशिकी (जन्मदोष), चोट, संक्रमण या कैंसर जैसे विभिन्न कारणों से मूत्र प्रणाली के कुछ हिस्सों में क्षय या कार्यात्मक विकार उत्पन्न हो सकते हैं। कभी-कभी, पुरुषों में उपस्थित सामान्य यूरोलॉजी समस्याएँ जैसे मूत्र असंयम (urinary incontinence), बांझपन, या बिनाइन गांठों का समय पर इलाज नहीं किया जाता है तो यह समस्याएँ असुविधा, दर्द, शर्मिंदगी या यहां तक ​​कि जीवन की समग्र गुणवत्ता में गिरावट का कारण बन सकती हैं। अतः इन समस्याओं को ओर अधिक जटिलताओं से बचाने के लिए लक्षण दिखते ही विशेषज्ञों से परामर्श करना बुद्धिमता होती है। मेदांता में, हमारे पास उरोलॉजी के विशेषज्ञ हैं जो पुरुष मूत्र प्रणाली और जनन प्रणाली से संबंधित समस्याओं का निदान और उपचार करने में माहिर हैं। 

 

पुरुष मूत्र संबंधी स्थितियाँ:

 

जन्मजात समस्याएँ: इनमें जन्म दोष के कारण विकृतियाँ और विरासत में मिली स्थितियों के कारण होने वाली समस्याएँ शामिल हैं, जो मूत्र पथ (गुर्दे, मूत्रवाहिनी और मूत्राशय) या जनन प्रणाली (प्रजनन अंग) को प्रभावित करती हैं। इनमें से कुछ विकृतियों का निदान गर्भावस्था, शिशुकाल, या बचपन में विकास के दौरान किया जा सकता है, जबकि अन्य विकृतियों किशोरावस्था या वयस्कता में लक्षण विकसित होने तक पता नहीं चल पाता है। इनमें से कुछ समस्याएँ निम्नलिखित हैं:

  • रीनल एजेनेसिस: जन्म से एक या दोनों किडनी की अनुपस्थिति
  • रीनल हाइपोप्लेसिया: इस स्थिति में किडनी पूरी तरह से विकसित नहीं होती है
  • रीनल एक्टोपिया: किडनी अपनी जगह से अलग जगह स्थित होती है
  • रीनल डिसप्लेसिया: किडनी के अंदर असामान्य संरचनाएँ उत्पन्न होना
  • पोस्टीरियर यूरेथ्रल वाल्व (पीयूवी): मूत्र मार्ग में असमान्यता के कारण मूत्र का स्वतंत्र प्रवाह में रुकावट सकती है, जिसके कारण मूत्र प्रणाली और किडनी को क्षति पहुंचती है।
  • वेसिकोयुरेट्रिक रिफ्लक्स (वीयूआर): इस स्थिति में मूत्र प्रणाली या किडनी में मूत्र का प्रवाह वापस जाता है, जिससे उनको क्षति पहुंच सकती है।

 

यदि इन समस्याओं का समय पर पता लग जाता है, तो इनका प्रभावी रूप से इलाज संभव है। इन्हें एक पीडियाट्रिक यूरोलॉजिस्ट या ऐसे ही बीमारियों का प्रबंधन करने के लिए प्रशिक्षित किसी भी यूरोलॉजिस्ट द्वारा मैनेज किया जाता है।

 

बांझपन: यह स्थिति एक वर्ष से अधिक समय तक असुरक्षित संभोग के बाद भी गर्भ धारण करने में असमर्थता के कारण पैदा होती है। बांझपन लगभग 15% जोड़ों को प्रभावित करता है, जिसमें पुरुष सभी मामलों का आधा हिस्सा बनाते हैं। एक अच्छा यूरोलॉजिस्ट बांझपन के कारण का सही निदान कर सकता है और उसके आधार पर एक उपचार योजना बना सकते है। हार्मोन स्तर, मानसिक स्थिति, कम शुक्राणु संख्या और तनाव पुरुषों में बांझपन की समस्याओं में योगदान कारक बन सकते हैं, और इन कारणों के आधार पर ही उपचार तय किया जाता है। यदि शीघ्र ही पता लगा लिया जाए और समय पर उपचार कर दिया जाए तो इनमें से कई कारणों को उलटा किया जा सकता है।

 

मूत्र असंयमितता (Urinary Incontinence): यह स्थिति तब होती है जब पेलविक दीवार की मांसपेशियाँ कमजोर हो जाती हैं और बिना जानकारी के मूत्र निकालने का कारण बनती है। यह आमतौर पर वृद्ध पुरुषों में अधिक सामान्य होती है और यह अन्य यूरोलॉजिकल विकारों के लक्षण के रूप में भी देखा जाता है। एक व्यक्ति अपने मूत्राशय पर नियंत्रण को खो सकता है, जिससे दौड़ने, हंसने, खांसने और अन्य रोज़मर्रा की गतिविधियों के दौरान पेशाब का थोड़ा रिसाव या बार-बार पेशाब आने की समस्या महसूस हो सकती है।

 

इरेक्टाइल डिसफंक्शन: यह डिसफंक्शन तब उत्पन्न होता है जब कोई पुरुष संभोग करते समय इरेक्शन प्राप्त करने या बनाए रखने में असमर्थ होता है। इरेक्टाइल डिसफंक्शन पुरुषों में शर्मिंदगी और डिप्रेशन का कारण हो सकती है क्योंकि यह व्यक्ति के जीवन का एक बहुत महत्वपूर्ण पहलू होता है। यूरोलॉजिस्ट के पास इरेक्टाइल डिसफंक्शन के लिए कई उपचार विकल्प होते हैं, जिनमें दवा, हार्मोनल थेरेपी, और सर्जरी (पेनाइल प्रॉस्थेसिस) शामिल हैं।

 

प्रोस्टेटाइटिस: यह प्रोस्टेट ग्रंथि में पाया जाने वाला गैर-कैंसरीय सूजन या संक्रमण होता है, जिसमें यूटीआई के समान लक्षण महसूस होते हैं। प्रोस्टेटाइटिस में व्यक्ति को मूत्र करने में दर्द, कमर दर्द, पेल्विक और पेट में दर्द महसूस हो सकते हैं। डॉक्टर आमतौर पर सूजन को कम करने और प्रोस्टेट को उसके सामान्य आकार में लाने के लिए एंटीबायोटिक्स की सलाह देते हैं।

 

प्रोस्टेट कैंसर: प्रोस्टेट ग्रंथि मूत्राशय के नीचे स्थित होती है और एक तरल पैदा करती है जो शुक्राणु की सुरक्षा और परिवहन का कार्य करता है। प्रोस्टेट ग्रंथि को प्रभावित करने वाला कैंसर को प्रोस्टेट कैंसर कहते हैं और यह पुरुषों में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक होता है। प्रोस्टेट ग्रंथि की कोशिकाएँ कैंसरीय हो जाती हैं, तो वे असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और तेजी से वृद्धि करने लग जाती है। पुरुषों को अपने पीएसए स्तर की वार्षिक जांच करवाने की सलाह दी जाती है, और इन स्तरों के आधार पर ही डॉक्टर उपचार विकल्प तय करते हैं।

 

बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लेसिया (बीपीएच): यह एक बड़े प्रोस्टेट या इसकी सूजन के लिए एक चिकित्सा शब्द है जो कैंसरीय प्रकृति का नहीं होता है। बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लेसिया आमतौर पर 50 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों और जिन पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का पारिवारिक इतिहास होता है, को प्रभावित करता है। बीपीएच में बढ़ती प्रोस्टेट ग्रंथि मूत्राशय के आउटलेट पर दबाव डालती है, जिससे अक्सर पेशाब  बार-बार करने की आवश्यकता महसूस होती है। पेशाब करने के बाद भी व्यक्ति को ऐसा लगता है कि ब्लैडर पूरी तरह से खाली नहीं हुआ है, और वह यह भी महसूस करता है कि मूत्र की एक कमजोर धारा बनती है। इस स्थिति के कारण व्यक्ति में आगे चलकर मूत्र पथ के संक्रमण के विकास की संभावना बढ़ जाती है, और इसका उपचार दवा और मॉनिटरिंग द्वारा किया जा सकता है। गंभीर मामलों में, यूरोलॉजिस्ट बीपीएच के उपचार के लिए सर्जरी (TURP/HOLEP) का सुझाव दे सकते हैं।

 

टेस्टोस्टेरोन कमी: टेस्टोस्टेरोन एक पुरुष हार्मोन होता है जो अंडकोष (testicles) द्वारा उत्पन्न होता है। यह हॉर्मोन यौन क्रियाओं और विकास को संचालित करता है, जैसे कि पुरुषों में यौवन के दौरान आवाज का गहरा होना और चेहरे पर बाल आना। इसकी कमी तब होती है जब किसी पुरुष का शरीर अपर्याप्त टेस्टोस्टेरोन का उत्पादन करता है, जिसके परिणामस्वरूप सेक्स ड्राइव में कमी, अपर्याप्त इरेक्शन, और अवसाद हो सकता है।

 

पुरुषों में यूरोलॉजी समस्याओं के लक्षण

 

ऐसे कई लक्षण हैं जो यूरोलॉजिक समस्याओं के संकेतक सिद्ध होते हैं। जब किसी को ये सामान्य समस्याएँ महसूस होती हैं, तो हमारी यह सलाह है कि आप एक यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करें। एक सही निदान डॉक्टर को उपयुक्त उपचार योजना बनाने और दर्द और परेशानी को कम करने में सहायक होता है। निम्नलिखित लक्षणों को आमतौर पर पुरुषों में यूरोलॉजी समस्याओं से जोड़ा जाता है:

  • पेशाब करने में कठिनाई आना
  • पेशाब करते समय दर्द या जलन अनुभव होना
  • मूत्र में खून या अन्य तरल का स्राव
  • बुखार और ठंड लगना
  • पिछली ओर या कमर के नीचे दर्द
  • जननांग में दर्द

हालांकि, इसे भी ध्यान में रखना चाहिए कि कई यूरोलॉजिक स्थितियाँ कोई भी लक्षण नहीं पैदा करती हैं या ये बहुत बाद में प्रकट होते हैं जब बीमारी काफ़ी एडवांस हो चुकी होती है। ऐसी कई स्थितियाँ नियमित जांच और स्वास्थ्य जांचों के दौरान पता लग सकती हैं।

 

यूरोलॉजी परीक्षण और प्रक्रियाएँ

 

यूरोलॉजी परीक्षण और प्रक्रियाएँ यूरोलॉजिस्ट को व्यक्ति के जनन-मूत्र प्रणाली संबंधी समस्याओं का सही निदान करने की अनुमति देते हैं। यूरोलॉजी रोगों का संबंध बहुत सारी अलग-अलग स्थितियों से है, और खास स्थितियों का निदान करने के लिए विशिष्ट टेस्ट और प्रक्रियाएँ होती हैं। डॉक्टर इन परीक्षणों को मरीज के लक्षणों को समझने और शारीरिक परीक्षण करने के बाद करते हैं। कुछ सामान्य परीक्षण और प्रक्रियाएँ जिनका उपयोग यूरोलॉजी समस्या के निदान के लिए किया जाता है, वह हैं:

  • पेट / रीनल अल्ट्रासाउंड: यह अल्ट्रासाउंड एक नोन-इनवेसिव इमेजिंग प्रक्रिया है, जिसका उपयोग पेट के अंदर के अंगों, जैसे कि किडनी और मूत्राशय की जांच के लिए किया जाता है। एक हाथ से पकड़े जाने वाले उपकरण द्वारा पेट को स्कैन किया जाता है जिससे डॉक्टर को शरीर के अंदर के हाई-रेजोल्यूशन छवि को देखने की अनुमति होती है।
  • बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरट्रोफी (बीपीएच) लक्षण स्कोर: यह एक प्रश्नपत्र की तरह होता है जिसे रोगी को भरकर देना होता है और डॉक्टर को इसके स्कोर की मदद से रोगी के लक्षणों की हल्कापन या गंभीरता को निर्धारित करने में मदद मिलती है। यह परीक्षण प्रोस्टेट के आकार का माप ज्ञात करने में मदद नहीं करता है।
  • यूरोफ्लोमेट्री: यह एक मशीन होती है जो संदिग्ध मूत्राशय आउटलेट में रुकावट से मूत्र प्रवाह दर की जांच करती है।
  • कम्प्यूटराइज़्ड टॉमोग्राफ़ी (सीटी) स्कैन: ये स्कैन इमेजिंग तकनीक का उपयोग करके शरीर के आंतरिक भागों की उच्च-रिज़ॉल्यूशन छवियाँ बनाता है। डॉक्टर आमतौर पर किडनी की पथरियों, या किडनी, मूत्रवाहिनी, मूत्राशय के द्रव्यमान की जांच के लिए सीटी स्कैन का चयन करते हैं।
  • मैग्नेटिक रेज़ोनेंस इमेजिंग (एमआरआई): प्रोस्टेट कैंसर का निदान करने और इसकी स्थानिक सीमा की निर्धारण के लिए एक कंट्रास्ट एमआरआई किया जाता है।
  • सिस्टोस्कोपी: सिस्टोस्कोप एक छोटा, लचीला फाइबर ऑप्टिक टेलीस्कोप होता है जिसका उपयोग मूत्रमार्ग और मूत्राशय की आंतरिक परत की जांच करने के लिए किया जाता है। आमतौर पर डॉक्टर सिस्टोस्कोपी तब करते हैं, जब रोगी बार-बार मूत्रमार्ग संक्रमण, दर्द या पेशाब में खून की शिकायत करता है, या जब अन्य छवि परीक्षणों में वृद्धि का पता चलता है।
  • सायटोलॉजी: यह मूत्र नमूने की जांच होती है ताकि मूत्र में उपस्थित असामान्य कोशिकाएँ, कैंसर कोशिकाएँ, या अन्य जीवों की पहचान की जा सके। 
  • इंट्रावेनस पायलोग्राम (आईवीपी) या यूरोग्राम (आईवीयू): इन प्रक्रियाओं का उपयोग ऊपरी मूत्रमार्ग, किडनी, और  मूत्रवाहिनी की जांच के लिए किया जाता है। इन में एक निकटवर्ती नस में डाई का इंजेक्शन देने के बाद डाई के प्रसारण की तस्वीरों को रिकॉर्ड किया जाता है।
  • प्रोस्टेट बायोप्सी: इस प्रक्रिया में प्रोस्टेट से संदिग्ध ऊतकों का नमूना लिया जाता है। यह आमतौर पर तब किया जाता है जब मलाशय की जांच में असामान्यताएँ पाई जाती हैं जो असहजता का कारण होता है।
  • यूरोडायनेमिक्स: इन परीक्षणों का आयोजन निचले मूत्रमार्ग की कार्यकलाप के मूल्यांकन करने के लिए किया जाता है।

This blog is a Hindi version of an English-written Blog - Male Urology Problems and Conditions

Medanta Medical Team
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