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हिचकी के बारे में ओर जानकारी प्राप्त करें

सभी व्यक्तियों को हिचकी किसी किसी समय बिंदु पर आयी है। हमारे पेट और सीने को सीमांकित करने वाली एक मांसपेशी होती है, जिसे 'डायाफ्राम' कहा जाता है। कुछ कारकों के कारण, मस्तिष्क डायाफ्राम को बलपूर्वक नीचे की ओर जाने का संकेत भेजता है, जिससे वायु अचानक गले के पीछे खींची जाती है। दबाव में अचानक बदलाव आने के कारण, गले में हमारे वोकल कॉर्ड्स के आसपास का एक छोटा सा क्षेत्र अस्थायी रूप से बंद हो जाता है, जिससे 'हिच' आवाज उत्पन्न होती है।

 

हिचकी आने के क्या कारण होते हैं

 

हिचकी कई शारीरिक या भावनात्मक प्रतिक्रियाओं के कारण उत्पन्न हो सकती है। वे तब शुरू होते हैं जब मस्तिष्क को डायाफ्राम से जोड़ने वाली तंत्रिका में समस्या आती है। इन प्रतिक्रियाओं में कुछ निम्नलिखित हैं

  • जीवनशैली कारक: ऐसी हिचकी आम तौर पर 48 घंटे से कम समय तक रहती है और इसके कई कारण हो सकते हैं, जिसमें शामिल हैं:
  • मसालेदार भोजन का सेवन 
  • अधिक भोजन खाना या बहुत जल्दी-जल्दी खाना
  • घबराहट, तनाव या उत्साह की स्थितियाँ 
  • कार्बोनेटेड पेय या बहुत अधिक शराब का सेवन करना
  • अचानक तापमान में परिवर्तन होना 
  • अधिक वायु निगलना (उदाहरण के लिए, च्युइंग गम चबाते समय या कैंडी खाते समय
  • चिकित्सीय कारक: कई चिकित्सीय स्थितियाँ भी क्रॉनिक हिचकी से जुड़ी हुई हैं। इनमें पेट से संबंधित समस्याएँ, श्वसन संबंधी स्थितियां, मधुमेह, यकृत और गुर्दे की समस्याएँ, कीमोथेरेपी के दुष्प्रभाव या तंत्रिका तंत्र से संबंधित विकार शामिल हैं।

 

लंबे समय तक हिचकी आने के क्या कारण होते है?

 

जिन मामलों में हिचकियाँ लंबे समय तक बनी रहती हैं, वे डायाफ्राम से जुड़ने वाली वेगस या फ्रेनिक तंत्रिकाओं के क्षतिग्रस्त होने या बिगड़ने का संकेत हो सकती हैं। ये नसें बहुत नाजुक होती हैं और जो साधारण बीमारियों जैसे गले में खराश या गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स, या आपके कान के परदे पर बाल छूने से आसानी से प्रभावित हो सकती हैं। गोइटर, गर्दन में गाँठें, या ट्यूमर भी इन नसों को क्षति पहुँचा सकते हैं।

 

दीर्घकालिक हिचकियाँ तंत्रिका तंत्र या चयापचय संबंधी विकारों का परिणाम हो सकती है जो आपके शरीर को हिचकियों के रिफ्लेक्स पर नियंत्रण करने में असमर्थ कर सकते हैं। इन में एन्सेफलाइटिस, मेनिनजाइटिस, स्ट्रोक, ट्यूमर, मल्टीपल स्केलेरोसिस, दर्दनाक मस्तिष्क की चोट, मधुमेह और गुर्दे की विफलता शामिल हैं।

 

स्टेरॉयड या ट्रैंक्विलाइज़र दवाएँ, और पेट को प्रभावित करने वाली कुछ चिकित्सा प्रक्रियाएँ या जिन प्रक्रियाओं में एनेस्थीसिया का उपयोग किया जाता है, लंबे समय तक की हिचकियों का कारण बन सकते हैं। महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में दीर्घकालिक हिचकी विकसित होने का जोखिम अधिक होता है। 

 

आपको डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

 

सौभाग्य से, अधिकांश मामलों में, हिचकियाँ कुछ मिनटों में खुद ही ठीक हो जाती हैं। अगर आपको 48 घंटों से अधिक समय से हिचकियाँ रहीं हैं, या यदि वे सांस लेने या खाने जैसे मूल शारीरिक कार्यों में हस्तक्षेप करके आपको परेशानी पहुँचा रही हैं, तो आपको एक डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। अगर आपको हिचकियों के साथ पेट दर्द, सांस की तकलीफ, बुखार, उल्टी हो या खांसी के साथ खून रहा है तो तत्काल चिकित्सीय सहायता लें।

 

हिचकियों का क्या उपचार है?

 

अक्सर हिचकियाँ अपने आप ही कुछ समय में ठीक हो जाती हैं, लेकिन यदि आपको बार-बार हिचकियाँ आती हैं, तो कार्बनेटेड पेय का सेवन छोड़ें और भोजन को धीरे-धीरे और छोटे-छोटे ग्रास में खाने का प्रयास करें। यदि आप घर पर हिचकियों से राहत पाना चाहते हैं, तो आप निम्नलिखित उपचार की कोशिश कर सकते हैं। ये वैज्ञानिक तरीके नहीं हैं, लेकिन ये वर्षों से इस्तेमाल किए जाने वाले कुछ सामान्य घरेलू उपाय हैं:

  • धीरे-धीरे ठंडे पानी की चुस्कियाँ लें या इससे गरारे करें
  • थोड़ी देर के लिए सांस बंद करें और फिर बाहर सांस छोड़ें, यह विधि तीन या चार बार करें
  • नींबू को खाएं या थोड़ा चीनी का सेवन करें
  • बैठ जाएं और अपने घुटनों को थोड़े समय के लिए जितना संभव हो सके सीधे अपने सीने के पास लगाएं
  • आगे की ओर झुकें ताकि आप धीरे से अपने सीने को दबा सकें
  • गले में अपनी उंगली डालकर गैग रिफ्लेक्स को ट्रिगर करें 

 

यदि आपके डॉक्टर को कोई अंतर्निहित चिकित्सीय समस्या दिखती है जो लंबे समय तक हिचकी का कारण बन रही है, तो वह दवाओं की मदद से इसका इलाज करने का सुझाव दे सकता है। कुछ सर्जिकल प्रक्रियाएँ फ्रेनिक नर्व को अवरुद्ध कर सकती हैं या ऐसी प्रक्रियाएँ जो बैटरी संचालित डिवाइस का उपयोग करके आपके वेगस नर्व को विद्युत रूप से उत्तेजित कर हिचकियों को रोक सकती हैं।

 

ध्यान रखें कि इन प्रक्रियाओं की सलाह केवल गंभीर मामलों में ही दी जाती जो शरीर के सामान्य कामकाज को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं।

This blog is a Hindi version of an English-written Blog - Know More About Hiccups

Medanta Medical Team
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