Facebook Twitter instagram Youtube
पित्ताशय या गॉलब्लैडर का कैंसर

पित्ताशय या गॉलब्लैडर का कैंसर

पित्ताशय नाशपाती के आकार का एक छोटा अंग होता है जो शरीर के दाहिनी ओर यकृत (liver) के ठीक नीचे स्थित होता है। पित्ताशय आपके यकृत द्वारा निर्मित पाचन तरल पदार्थ, पित्त, के संग्रहण का कार्य करता है। पित्ताशय का कैंसर दुर्लभ होता है। यदि प्रारंभिक चरण में इसका पता चल जाए, तो उपचार का पूर्वानुमान अच्छा रहता है। हालाँकि, पित्ताशय कैंसर के कोई विशिष्ट संकेत या लक्षण नहीं होते हैं, अतः अधिकांश का पता तब चलता है जब कैंसर एडवांस चरण में पहुँच जाता है, और तब इसका पूर्वानुमान भी अक्सर बहुत खराब होता है। 

 

पित्ताशय के कैंसर के लक्षण 

 

गॉलब्लैडर कैंसर के प्रमुख लक्षण और संकेत निम्नलिखित हैं:

  • पेट में दर्द, खासकर ऊपरी दाईं तरफ़ 
  • पेट में सूजन
  • बुख़ार या सूजन
  • मतली और उल्टियाँ
  • पेट में गाँठें
  • वजन का घटना 
  • त्वचा, आंखों के सफेद भाग, और नाखूनों का पीला (पीलिया) दिखना 

 

पित्ताशय कैंसर के चरण 

 

कैंसर के बारे में सबसे बड़ी चिंता मेटास्टेसिस (कैंसर कोशिकाओं का दूरस्थ अंगों में फैलना) है। मेटास्टेसिस की सीमा को निर्धारित करने के लिए कुछ संख्याएँ काम में ली जाती हैं। इसेमंचन" (स्टेजिंग) के रूप में जाना जाता है; ज्यादा संख्या का मतलब है कि कैंसर आपके शरीर में उतना ही अधिक प्रगति कर चुका है।

पित्ताशय कैंसर के चरण निम्नलिखित हैं:

चरण 0 (जिसे "कार्सिनोमा इन सीटू" भी कहते है): कैंसर पित्ताशय की श्लैष्मिक या म्यूकोसल (आंतरिक) परत तक ही सीमित होता है।

चरण 1: कैंसर कोशिकाएँ मांसपेशियों की परत तक पहुंच गई हैं।

चरण 2: कैंसर मांसपेशी की परत के परे संयोजी ऊतक (connective tissue) परत तक फैल गया है।

चरण 3: कैंसर लिवर या उसके पास के अंगों, या या बाहरी परत (सेरोसल) तक फैल गया है, और संभावना से लिम्फ ग्रंथियों तक पहुंच गया है। 

स्टेज 4: कैंसर तीन से अधिक पास के लिम्फ नोड्स, आस-पास की वाहिकाओं, और/या पित्ताशय से दूर स्थित अंगों में फैल गया है।

 

पित्ताशय कैंसर का निदान:

 

पित्ताशय कैंसर का आमतौर पर होने के वर्षों बाद पता चलता है क्योंकि इसका पता लगाने के लिए शुरुआती चेतावनी संकेत या लक्षण मुश्किल से ही महसूस होते हैं, और जो होते हैं वे अन्य विकारों के साथ मिलते-जुलते होते हैं। यदि डॉक्टर को पित्ताशय कैंसर का संदेह होता है, तो सबसे पहले एक संपूर्ण जांच की जाती है और पूरा चिकित्सा इतिहास दर्ज किया जाता है। अन्य परीक्षण जो इसके निदान के लिए आवश्यक होंगे, वे हैं:

लैब टेस्ट:

  • रक्त केमिस्ट्री: यह परीक्षण आपके रक्त में विशिष्ट पदार्थों के स्तर को मापता है, जिसमें कैंसर को सूचित कर सकने वाले मापक हो सकते हैं।
  • लिवर फंक्शन टेस्ट (एलएफटी): एलएफटी आपकी लिवर द्वारा स्रावित कुछ पदार्थों के स्तर को मापता है, जिससे पता चल सकता है कि कैंसर ने लिवर को प्रभावित किया है या नहीं।
  • कार्सिनोएम्ब्रियोनिक एंटीजन (सीईए) जांच: इस परीक्षण में सीईए (एक ट्यूमर मार्कर, जिसे स्वस्थ और कैंसर कोशिकाओं दोनों द्वारा स्रावित किया जाता है) के स्तर को मापा जाता है।
  • सीए 19-9 जांच: यह परीक्षण खून में ट्यूमर मार्कर सीए-19-9 के स्तर को मापता है। सीए 19-9 के अधिक स्तर पित्ताशय या पैनक्रियास कैंसर का संकेतक होते हैं।

 

छवि परीक्षण: 

इस परीक्षण का उपयोग पित्ताशय कैंसर के आकार, स्थिति और क्षति का पता लगाने के लिए विभिन्न स्थानों से पित्ताशय की सटीक छवियां को प्राप्त करने के लिए किया जाता है। कुछ सामान्य छवि परीक्षण हैं:

  • पेट का अल्ट्रासाउंड 
  • सीटी (या कैट) स्कैन या एब्डोमिनल सीटी स्कैन
  • छाती का एक्स-रे
  • एमआरआई (चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग)
  • एंडोस्कोपिक रेट्रोग्रेड कोलेजनोपैंक्रेटोग्राफी (ईआरसीपी)
  • एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड

 

अन्य परीक्षण: 

 

इन परीक्षणों का उद्देश्य गॉलब्लैडर में कैंसर या विचित्र कोशिकाओं की मौजूदगी की पुष्टि करना होता है, इनमें शामिल हैं:

  • बायोप्सी 
  • लेप्रोस्कोपी

 

पित्ताशय कैंसर के उपचार:

 

पित्ताशय कैंसर के पूर्ण उपचार प्रदान करने में शामिल विशेषज्ञ हैं:

  • सर्जन/सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट: एक कैंसर उपचार विशेषज्ञ
  • मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट: वे कीमोथेरेपी और अन्य दवाओं में सहायक होते हैं।
  • रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट: वे रेडियोथेरेपी में सहायक होते हैं और कैंसर के प्रसार को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
  • गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट: ये पाचन तंत्र के विशेषज्ञ होते हैं।

पित्ताशय कैंसर को पूरी तरह से ठीक करने के लिए इसे अन्य अंगों में फैलने से पहले इसे शुरुआती चरण में पहचाना जाना चाहिए। इसका उपचार आमतौर पर कैंसर के चरण पर निर्भर करता है।

 

कैंसर के उपचार विकल्प निम्नलिखित हैं:

  • सर्जरी: पित्ताशय का शल्य चिकित्सा द्वारा निकालना कोलेसिस्टेक्टोमी कहलाता है। इसके अलावा, सर्जन पित्ताशय के पास लिवर का एक हिस्सा और उसके पास के लिम्फ नोड्स को भी निकाल सकते हैं।
  • रेडिएशन थेरेपी: यह उपचार कैंसर को बढ़ने से रोकने के लिए कैंसर कोशिकाओं को मारता है, और इसकी वृद्धि को रोकता भी है, जिससे स्वस्थ कोशिकाओं को कम क्षति पहुँचे। यह शरीर के बाहर की ओर एक मशीन का उपयोग करता है जो विकिरणों को कैंसर क्षेत्र की तरफ़ निर्देशित करता है। रेडिएशन उपचार के कई दुष्प्रभाव हो सकते हैं, जिसमें त्वचा समस्याएँ, मतली, उलटी, थकान, लिवर की क्षति और/या दस्त शामिल हो सकते हैं।
  • कीमोथेरेपी: कीमोथेरेपी उपचार में कैंसर कोशिकाओं को मारने या उन्हें बढ़ने से रोकने के लिए दवाओं का उपयोग होता है। इन्हें शरीर में इंजेक्ट किया जा सकता है या मौखिक रूप से (मुँह से) लिया जा सकता है। कीमो के दुष्प्रभावों में थकान, आसानी से नील पड़ना, आसानी से खून बहना, बालों का झड़ना, भूख में कमी, दस्त, मतली और उल्टी शामिल हो सकते हैं।

 

कुछ क्लिनिकल ट्रायल भी नए प्रकार के इलाज की कोशिश कर रहे हैं, जैसे कि:

  • रेडिएशन सेंसिटाइजर्स
  • लक्षित (Targeted) थेरेपी
  • इम्यूनोथेरेपी

 

निष्कर्ष:

 

पित्ताशय कैंसर एक दुर्लभ और घातक बीमारी है। यदि आपको इसके लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो तुरंत अपने डॉक्टर से परामर्श करें। हालांकि कुछ ट्यूमर शुरुआती चरण से ही लक्षण दिखा सकते हैं, परंतु पित्ताशय कैंसर में तब तक लक्षण और संकेत उत्पन्न नहीं होते हैं, जब तक यह उन्नत चरण में पहुँच जाए। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभावों से बचने के लिए जल्द से जल्द से उपचार करवाना महत्वपूर्ण है।

 

This blog is a Hindi version of an English-written Blog - Gallbladder Cancer

Dr. Azhar Perwaiz
Gastrosciences
Meet The Doctor
Back to top