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कार्पल टनल सिंड्रोम: लक्षण, निदान और उपचार

कार्पल टनल सिंड्रोम क्या है?

 

कार्पल टनल सिंड्रोम (सीटीएस), या कलाई में मेडियन न्यूरोपैथी, एक चिकित्सीय स्थिति होती है जिसमें कलाई के क्षेत्र में मेडियन नर्व पर दबाव पड़ता है, जिससे हाथ में पेरेस्टेसिया, सुन्नता और मांसपेशियों में कमजोरी हो सकती है। सीटीएस के अधिकांश मामले इडियोपैथिक (बिना किसी ज्ञात कारण के) होते हैं; अधिकांशतः जोखिम के ज्ञात कारणों में जेनेटिक कारक मुख्य होता है, और हाथ का उपयोग और अन्य पर्यावरणीय कारकों की भूमिका विवादास्पद है।

 

कार्पल टनल सिंड्रोम स्थिति के क्या लक्षण हैं?

 

रात के समय के लक्षण और इसके कारण नींद से उठना इस बीमारी की पहचान है। कार्पल टनल सिंड्रोम से ग्रसित कई व्यक्तियों में समय के साथ धीरे-धीरे लक्षण बढ़ते हैं। सीटीएस के शुरुआती लक्षण सामान्यतः रात को महसूस होते हैं, जिसमें आमतौर पर अँगूठे, तर्जनी और मध्यमा उंगलियों में सुन्नता और पेरेस्टेसिया (जलन और झनझनाहट की भावना) शामिल होते हैं, हालांकि कुछ मरीज़ों को हथेली में भी लक्षण अनुभव हो सकते हैं। ये लक्षण रात को महसूस होते हैं क्योंकि लोगों की सोते समय अपने कलाइयों को मोड़ने की प्रवृत्ति होती हैं, जिससे कार्पल टनल में ओर अधिक दबाव पड़ता है।

 

अधिकतर रोगी यह नोटिस करते हैं कि उनसे "वस्तुएं गिर जाती हैं" हालाँकि यह स्पष्ट नहीं है कि कार्पल टनल सिंड्रोम के कारण चीजों को पकड़ने में समस्या होती है या नहीं, लेकिन इस स्थिति में पसीना आना कम हो जाता है, जिससे किसी वस्तु और त्वचा के बीच घर्षण कम हो जाता है।

 

कार्पल टनल सिंड्रोम के प्रारंभिक चरणों में व्यक्ति हाथों की झनझनाहट और सुन्नता को अक्सर रक्त संचार में रुकावट को जिम्मेदार मानते हैं। वे इन लक्षणों को यह समझते हैं कि उनके हाथ सो रहे हैं।

 

क्रॉनिक स्थिति में, थेनर मांसपेशियों (अंगूठे से जुड़ी मांसपेशियों) की क्षति हो सकती है, अंगूठे के पामर अब्डक्शन की कमजोरी (अंगूठे को हाथ से दूर लाने में कठिनाई) के अलावा, जब तक सुन्नता या पेरेस्टेसिया, प्रमुख लक्षणों में से नहीं होते हैं, तो यह संभावना नहीं है कि ये लक्षण मुख्य रूप से कार्पल टनल सिंड्रोम के के कारण होते हैं। वास्तव में, बिना सुन्नता या पेरेस्टेसिया के किसी भी प्रकार, स्थान या गंभीरता का दर्द इस स्थिति के निदान के अंतर्गत आने की संभावना नहीं होती है।

 

कार्पल टनल सिंड्रोम के क्या कारण हैं?

 

सीटीएस के अधिकांश मामले बिना किसी ज्ञात कारण (idiopathic) होते हैं। कभी-कभी सीटीएस चोट, गर्भावस्था, मल्टीपल माईलोमा, एमिलॉयडोसिस, रुमेटोइड आर्थराइटिस, एक्रोमेगाली, म्यूकोपोलीसैकेराइडोसिस, या हाइपोथायरायडिज्म के कारण भी हो सकता है। इसके मुख्य जोखिम कारक निम्नलिखित है:

आनुवांशिक कारक: कार्पल टनल सिंड्रोम के लिए सबसे महत्वपूर्ण जोखिम कारक पर्यावरण या दैनिक जीवनशैली से संबंधित होने के बजाय संरचनात्मक और जैविक हैं। 

कार्य-संबंधित कारक: कार्पल टनल सिंड्रोम और कार्य का प्रकार के मध्य का संबंध संदेह से पूर्ण है। कुछ लोग सोचते हैं कि कार्पल टनल सिंड्रोम बार-बार वस्तु पकड़ने और कुशलता वाले काम में अतिरिक्त गतिविधियों के कारण उत्पन्न होता है, और यह जोखिम बढ़ाने वाले हो सकते हैं। यह भी माना जाता है कि औद्योगिक व्यवसायों में हाथ और कलाइयों के ज़ोरदार और बार-बार उपयोग से कार्पल टनल सिंड्रोम के लक्षण आमतौर पर बढ़ जाते हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह दर्द को इंगित करता है (जो कार्पल टनल सिंड्रोम के कारण नहीं हो सकता) या सामान्य सुन्नता का लक्षण होता है।

मनोसामाजिक कारक: विभिन्न अध्ययनों के अनुसार, अधिकतर गतिविधि-संबंधी ऊपरी अंग के दर्द को मनोसामाजिक और सामाजिक कारकों से जोड़ा जाता है, लेकिन अधिकांशतः ऐसे दर्द असामान्य होते हैं लेकिन आमतौर पर कार्पल टनल सिंड्रोम के रूप में गलत समझे जाते हैं।

चोट:

  1. बाजु की हड्डियों में से एक में फ्रैक्चर
  2. कलाई की कार्पल हड्डियों में से एक का विस्थापन (dislocation)
  3. कलाई या निचली बाँह में मजबूत ब्लंट चोट, उदाहरण के लिए भारी वस्तुओं द्वारा चोट और अपने आप को गिरने से बचाने के लिए हाथ के अगले भाग का उपयोग करने से ब्लंट चोट लग सकती है।
  4. इलेक्ट्रिक बर्न तत्कालिक कार्पल टनल सिंड्रोम का कारण हो सकता है
  5. पुराने हड्डी फ्रैक्चर के असामान्य उपचार से विकृति उत्पन्न होने से 

 

कार्पल टनल सिंड्रोम का निदान कैसे किया जाता है?

 

कार्पल टनल सिंड्रोम के निदान के लिए इलेक्ट्रो फिजिकल परीक्षण एक स्टैण्डर्ड टेस्ट होता है। जिन व्यक्तियों में मीडियन नर्व के वितरण क्षेत्र में रुक-रुक कर सुन्नता आना और सकारात्मक (positive) फालेन और डर्कन परीक्षण है, लेकिन नॉर्मल इलेक्ट्रो फिजिकल परीक्षण सामान्य है, उनमें घात होने पर बहुत हल्के रूप में कार्पल टनल सिंड्रोम हो सकता है। इलेक्ट्रो फिजिकल टेस्टिंग के कोई भी परिणाम होने पर, यदि सुन्नता के बजाय दर्द अगर अधिक मात्रा में है तो कार्पल टनल सिंड्रोम का कारण नहीं होने की संभावना कम होती है। चिकित्सीय आकलन रोगी के इतिहास और शारीरिक परीक्षण के द्वारा सीटीएस के नैदानिक तरीकों से इसका निदान किया जा सकता है। 

  • फालेन परीक्षण में हाथ को जितना हो सके उतना धीरे-धीरे मोड़ना होता है। फिर इस स्थिति को बनाए रखकर लक्षणों के उत्पन्न होने की प्रतीक्षा की जाती है। एक सकारात्मक परीक्षण में 60 सेकंड के अंदर कलाई के तीव्र फ्लेक्स की स्थिति में मीडियन नर्व के क्षेत्र में सुन्नता महसूस होती है। जितनी जल्दी से सुन्नता प्रारंभ होती है, समस्या उतनी अधिक एडवांस स्टेज में होती है।
  • टिनेल साइन (Tinel’s sign), एक क्लासिक, हालांकि कम विशिष्ट परीक्षण, उत्तेजित तंत्रित नसों का पता लगाने का एक टेस्ट होता है। टिनेल परीक्षण में, तंत्रिका के ऊपर के क्षेत्र पर हल्के हाथ से टैप करके तंत्रिका वितरण के स्थानों पर झुनझुनी या "पिन और सुइयों" का एहसास कराया जाता है।
  • लक्षणों का पता करने के लिए डर्कन टेस्ट, कार्पल कम्प्रेशन टेस्ट, या तंत्रिका पर 30 सेकंड तक हथेली का दृढ दबाव डालने का भी सुझाव दिया गया है।

 

कार्पल टनल सिंड्रोम का उपचार क्या है?

सीटीएस में उपचार की प्रभाविता का मूल्यांकन करने के लिए कई वैज्ञानिक विभिन्न अध्ययन कर रहे हैं। आम तौर पर स्वीकृत उपचारों में स्प्लिंटिंग या ब्रेसिंग, स्टेरॉइड इंजेक्शन, जीवन शैली में बदलाव, फ़िज़ियोथेरेपी या ऑक्यूपेशनल थेरेपी, दवाएँ, और ट्रांसवर्स कार्पल लिगामेंट की सर्जरी शामिल हैं।

  • कलाई का स्प्लिंट: यह कलाई की गतिविधि को सीमित करके सुन्नता को सीमित करने में मदद करता है। रात्रि को कलाई की स्प्लिंटिंग करने से से रोगी को नींद में मदद मिलती है। इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि कलाई की स्प्लिंटिंग रोग को कम करने में लाभप्रद होती है। सीटीएस के उपचार में कलाई के ब्रेसिज़ और स्प्लिंट का महत्व ज्ञात है, लेकिन कई लोग इनके इस्तेमाल करने के लिए अनिच्छुक होते हैं। कार्पल टनल सिंड्रोम के प्राथमिक उपचार के रूप में ब्रेसिज़ के अलावा जीवनशैली में बदलाव और नोन-स्टेरायडल एंटीनफ़्लमेटरी ड्रग, और इसके बाद लक्षणों में सुधार नहीं होने पर अधिक आक्रामक विकल्प या विशेषज्ञ रेफरल का सुझाव देते हैं। अधिकांश डॉक्टर यह सुझाव देते हैं कि सबसे अच्छा परिणाम प्राप्त करने के लिए, रात्रि को ही ब्रेस धारण करें और यदि संभव हो, दिन में भी वे गतिविधि के दौरान हाथों पर तनाव के समय पहन सकते हैं।
  • स्थानीय स्टेरॉइड इंजेक्शन: स्टेरॉइड के इंजेक्शन थोड़े समय के लिए सीटीएस के लक्षणों से अस्थायी राहत प्रदान कर सकते हैं उतने समय तक रोगी एक लंबे समय अपने जीवन शैली से मेल खाता हुआ उपचार विकसित करता है। कुछ रोगियों में, इंजेक्शन का एक नैदानिक ​​महत्व भी हो सकता है। हालाँकि, यह उपचार लंबे समय तक लाभकारी नहीं होता है। सामान्य तौर पर, डॉक्टर जब तक उपयुक्त उपचार विकल्प की पहचान नहीं होने तक सीटीएस के लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय स्टेरॉइड इंजेक्शन प्रेस्क्राइब करते हैं। अधिकांश रोगियों को स्थायी राहत के लिए सर्जरी की आवश्यकता होती है।
  • फ़िज़ियोथेरेपी: इस समस्या के सुधार उपचार के रूप में फिजियोथेरेपी या ऑक्यूपेशनल थेरेपी के फ़ायदे का समर्थन करने के लिए कम प्रमाण मिलता है।
  • ऑक्यूपेशनल थेरेपी: ऑक्यूपेशनल थेरेपी लक्षणों को गंभीर होने से रोकने के लिए एर्गोनोमिक सुझाव देती है और ऑक्यूपेशनल थेरापिस्ट कार्यात्मक गतिविधियों के माध्यम से हाथ के कार्यों को आरामदायक बनाता है और एक अनुकूल कार्यात्मक जीवन के लिए आवश्यक कार्यों को पुनः प्राप्त करने में मदद करता है।
  • दवाएँ: ओवर--काउंटर उपलब्ध एंटी-इंफ्लेमेट्री दवाएँ जैसे एस्पिरिन, इबुप्रोफेन, या नैप्रॉक्सेन लक्षणों को नियंत्रित करने में सहायक सिद्ध होती हैं। पैरासीटामोल जैसी दर्द-निवारक दवाएँ केवल दर्द को कम कर सकती हैं, वही दूसरी तरफ़ एंटी-इंफ्लेमेट्री दवाएँ संभावित रूप से मूल समस्या का इलाज कर सकती हैं, जो सूजन को कम करती हैं और समस्या की जड़ तक पहुंचती हैं। मुँह से लेने वाले स्टेरॉयड भी इसी तरह काम करते हैं, लेकिन आमतौर पर दुष्प्रभावों के कारण इनका उपयोग नहीं किया जाता है। नोन-स्टेरॉयड एंटी-इंफ्लेमेट्री दवाओं के उपयोग से कुछ अस्थमा के रोगियों में इस स्थिति के लक्षण गंभीर हो सकते हैं, इसलिए सीटीएस के उपचार के लिए प्रेड्निजोन जैसे स्टेरॉयड का उपयोग करना अधिक सुरक्षित विकल्प बन जाता है। दवाओं का लंबे समय तक उपयोग से जुड़े सबसे सामान्य संक्रमण के विकार हृदय से जुड़े रहते हैं। लंबे समय तक एंटी-इंफ्लेमेट्री दवाओं के उपयोग से होने वाले सबसे आम दुष्परिणामों को दिल से संबंधित जटिलताओं से जोड़ा गया है। क्रोनिक, दीर्घकालिक दर्द के लिए एंटी-इंफ्लेमेट्री दवाओं का सेवन डॉक्टर की देखरेख में ही किया जाना चाहिए।कार्पेल टनल के भीतर सूजन और नर्व पर दबाव को कम करने के लिए एक अधिक आक्रामक औषधीय विकल्प कोर्टिसोन स्टेरॉयड का एक इंजेक्शन है।
  • कार्पेल टनल रिलीज सर्जरी: डॉक्टर ट्रांसवर्स कार्पल लिगामेंट की रिलीज सर्जरी (कार्पल टनल रिलीज) की सलाह तब देते हैं, जब कलाई में लगातार या स्टेटिक (हमेशा मौजूद, कि केवल रुक-रुक कर होने वाली सुन्नता), पामर एबडक्टर मांसपेशी की कमजोरी, या अपक्षय, या जब रात की स्प्लिंटिंग से ये रुक-रुक कर आने वाले सुन्नता के लक्षण नियंत्रित नहीं होते हैं। सामान्य रूप से, हल्के लक्षणों वाले मामलों को महीनों या वर्षों तक नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन गंभीर मामलों में लक्षण कभी कम नहीं होते हैं, और इसके परिणामस्वरूप शल्य चिकित्सा उपचार की आवश्यकता महसूस होती है।

 

यदि आप सर्जरी के बाद बुखार, लालिमा, सूजन या छूने पर दर्द महसूस करते हैं, तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श करें।

Dr. Rishabh Kedia
Neurosciences
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